एकला चलो रे..!

सदाग्रहएक विमर्श मंच है जहाँ प्रयास होगा विभिन्न समाधानों के लिए एक बौद्धिक पहल का...विमर्श से एक शांतिपूर्ण समाधान की खोज और एक अपील इसे अपनाने की सहभागी बंधुओं से....आपका रचनात्मक सहयोग अपेक्षित है...!

सोमवार, 28 सितंबर 2009

सदाग्रह एक अपील...शांति, सद्भावना के लिए..


..जीवन की होड़ में जीवन फिसल जाता है.. हम हिसाब लगाते रह जाते हैं और मोड़ आ जाता है. फिर बदल जाते हैं मायने सब मतलबों के और एक प्याला खाली का खाली ही टूट जाता है. समाधान है हर एक विवाद का, शांतिपूर्वक और सद्भावना के साथ.. विवाद, संवाद को प्रेरित करता है, ताकि एक सेतु बन सके जिस पर हम अपनी नवीन उपलब्धियां गढ़ सकें... आइए विमर्श के उन रचनात्मक विकल्पों की चर्चा करें जिनसे यथार्थ के समाधान मिल सकें...इस कोशिश में योग दें..यही सदाग्रह है आपसे...........

1 टिप्पणी:

कुमार अम्बुजेश ने कहा…

गांधी सत्य हैं, गांधी विचार है,गांधी आस्था भी है, और गांधी चमत्कार भी है....लेकिन शायद अब गांधी मुन्नाभाई हैं...मेरा भतीजा गांधी को इसी रुप में जानता है...श्रीश जी मुझे जहां तक लगता है कि गांधी को समझना उतना मुश्किल नहीं है जितना कि ये सोचना कि आखिर गांधी को कब तक औऱ किस हद तक समझा जाय....एक अच्छी शुरुआत के लिए धन्यवाद....इस मुहिम का हिस्सा बनने में मुझे काफी खुशी होगी